Saturday, 2 April 2016

1-767अपनों के लिए उससे

अपनों के लिए उससे फरियाद कर लेता हूँ
मैं खुदा का बंदा दुश्मनों को भी याद कर लेता हूँ..(वीरेंद्र)/1-767


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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