Tuesday, 19 April 2016

0-551 ज़ालिम है दुनियां, तो "वक्त"

ज़ालिम है दुनियां, तो "वक्त" भी कुछ कम नहीं,
आकर छीन लेता है मेरी खुशियाँ, पर गम नहीं,

ज़रा सब्र से काम लिया कर, ये कहकर मुझसे,
हर बार ही दे जाता है ज़ख्म, कोई मरहम नहीं..(वीरेंद्र)/0551


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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