Wednesday, 13 April 2016

0-550 काश, ऐसी हसीं किस्मत

काश, ऐसी हसीं किस्मत हमारी होती,
तेरी जैसी रात हमने भी गुज़ारी होती।
यूं ना भटकते फिरते इस कदर तन्हा,
पुरसुकूं आशना ज़िन्दगी हमारी होती..(वीरेन्द्र)/0-550


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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