Saturday, 2 April 2016

0-549 मेरे मालिक तू चाहे तो

मेरे मालिक तू चाहे तो आँखें नम देदे,
किसी की ख़ुशी के लिए मुझे गम देदे,
बस इतनी सी इल्तिजा है तुझसे मेरी,
तन्हाई न देना चाहे जितने सितम देदे..(वीरेंद्र)/0-549


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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