Saturday, 2 April 2016

0-548 आँखों में आंसू कभी

आँखों में आंसू कभी न आया करते,
हसीन लम्हे अगर रुक जाया करते,
तन्हाई, जुदाई, इम्तिहाँ हैं इश्क के,
लोग किसी को कैसे आजमाया करते..(वीरेंद्र)/0-548


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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