Monday, 14 March 2016

1-757 तू तो बन गया मेहरबां

तू तो बन गया मेहरबाँ, देके उधार की ज़िन्दगी,
पर मुझे बता क्या करूँ मै लेके ख़ार की ज़िन्दगी.(वीरेंद्र)/1-757.


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" 

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