Saturday, 26 March 2016

2-399 ऐसा मंदिर नहीं देखा

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ऐसा मंदिर नहीं देखा, कोई मस्जिद ऐसी नहीं देखी,
कोई घर ऐसा नहीं देखा, कोई नगरी ऐसी नहीं देखी,
मै तलाशता ही रहा मज़हबी भाईचारा जगह-जगह,
मगर धर्म-निरपेक्षता कहीं मयखाने जैसी नहीं देखी..(वीरेंद्र)/2-399


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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