Friday, 25 March 2016

2-398 एक गद्दार मांगता है आजादी

एक गद्दार मांगता है आज़ादी उससे, जिसने उसे पैदा किया है,
मांगता है बर्बादी उसकी जिसने उसे पाल-पोस के बड़ा किया है,
वो कमज़र्फ अपना हमदर्द समझता है बस उन सियासतदां को,
मादरे-वतन को जिन्होंने अक्सर दुश्मनों के हाथों बेचा किया है..(वीरेंद्र)/2-398


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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