Friday, 25 March 2016

2-397 मेरे पूर्वजों ने

मेरे पूर्वजों ने खाया पीठ में छुरा गद्दारों से,
मगर मैं तो नहीं खाऊंगा धोखा गद्दारों से,
बहुत निभाया है इंसानियत का भाईचारा,
अब ना रक्खूँगा मै, कोई रिश्ता गद्दारों से..(वीरेंद्र)/2-397


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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