Friday, 25 March 2016

2-396 आज का पढ़ा-लिखा

आज का पढ़ा-लिखा समझदार आदमी,
फिर भी मुल्क से कितना गद्दार आदमी,
आज़ाद देश का आज़ाद बाशिंदा हो कर,
किस आज़ादी की करता दरकार आदमी..(वीरेंद्र)/2-396


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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