Saturday, 12 March 2016

2-394 भारत माँ हम तुझसे

ऐ भारत माता हम तुझ से शर्मिंदा हैं,
कि तुझ पर वार करने वाले जिंदा हैं,
सहिष्णुता की बातें  अब नहीं करेंगे,
तेरे और टुकड़े बर्दाश्त अब नहीं करेंगे. 
दे देंगे हम उनको जीवन से आजादी,
जो मांग रहे थे हमारी माँ की बर्बादी,
ऐ माँ अब तू भी हमें नहीं रोक सकेगी,,
अब गिद्धों के विरुद्ध जंग हो कर रहेगी
हम भी देखें कौन किस घर से पैदा होगा,
हर घर पे माँ तेरा भगत सिंह बैठा होगा,
हम तुझसे शर्मिंदा थे,अब और न होंगे,
माँ तेरे अपराधी पैदा,  अब और न होंगे..(वीरेंद्र)/2-394

रचना:वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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