Saturday, 12 March 2016

2-393 हम बस वीर रस की कविता

हम बस वीर रस की कविता करते जाएंगे,
और ये गद्दार देश को गर्त में डुबाते जाएंगे,
वाद-विवाद विचार-विमर्श में पड़े रहेंगे हम,
वे नारों को अपने अमली जामा पहनाते जाएंगे",
चिंगारी लगा ये लोग जश्न मनाते जाएंगे,
कुछ नेता आग में और घी डालते जाएंगे,
गद्दार बदलके रख देंगे इतिहास मुल्क का,
भावी पीढ़ी कोे कौनसा नया इतिहास ये पढ़ाएंगे.

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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