Friday, 25 March 2016

2-392 चली है कुछ ऐसी हवा

चली है कुछ ऐसी हवा, लगता है मैं अपने वतन में नहीं हूँ,
है कोई रहनुमा, जो मुझे एहसास दिला दे मैं वतन में ही हूँ..(वीरेंद्र)/2-392


वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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