Friday, 25 March 2016

2-390 किसने सोचा था आज़ाद

किसने सोचा था आज़ाद भारत में फिरसे गद्दारी की आवाज़ें उठेंगी,
खुदगर्जी छोड़ उठा लो तलवारें, नहीं तो मुल्क में फिर दीवारें उठेंगी..(वीरेंद्र)/2-390


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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