Thursday, 17 March 2016

2-388 हमवतन भी काबिल-ऐ-दोस्ती

हमवतन भी काबिल-ऐ-दोस्ती नहीं,
गर उसमे जज़्बा-ऐ-वतनपरस्ती नहीं./2-388


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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