Saturday, 12 March 2016

2-386 सब कोई कहाँ

सब कोई कहाँ ज़ुल्मो-सितम सह पाते हैं,
चराग भी होके रौशन तूफां में बुझ जाते हैं..(वीरेंद्र)/2-386

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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