Saturday, 12 March 2016

2-385 तू पत्थर थी,

तू पत्थर थी, मै भी तेरा उत्तर हो गया हूँ,
तेरी तरह जमकर मै भी पत्थर हो गया हूँ..(वीरेंद्र)/2-385

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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