Saturday, 12 March 2016

2-381 माना अधिक ज्वलंत है

माना अधिक ज्वलंत है तेरी तृष्णा,
पर इतनी अधीर न हो, नव-यौवना,
धरती की प्यास न बुझी, न बुझेगी,
बेचारा सावंत बरस ले चाहे जितना..(वीरेंद्र)/2-381

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"


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