Sunday, 27 March 2016

1-764 बेइंतहा मुहब्बत है मुझे

बेइंतहा मुहब्बत है मुझे उससे, मैं उसे खोना नहीं चाहता,
है अगर वो बेवफा, तो हो, मैं उसे आज़माना नहीं चाहता..(वीरेंद्र)/1-764


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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