Saturday, 26 March 2016

1-763 मेरे सामने से गुज़र गया

मेरे सामने से गुज़र गया बनकर अंजाना सा वो,,
मैंने न दी आवाज़, फिरभी क्यों लगा रुका सा वो..(वीरेंद्र)/1-762


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"...

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