Saturday, 26 March 2016

1-762 तुझ ही से क्यों शिकवा

तुझ ही से क्यों शिकवा किया जाय तेरे बदल जाने का,
मौसम से भी भला कभी कोई शिकवा किया करता है.(वीरेंद्र)/1-762


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"...

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