Monday, 7 March 2016

1-758मेरा दिल मेरे जज़्बात

मेरा दिल मेरे जज़्बात चोट खाये हो गए,
दोनों थे मेरे, पर आज वो पराये हो गए..(वीरेंद्र)/1-758


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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