Monday, 7 March 2016

1-753 तुम्हारी तरह अब तलक

तुम्हारी तरह अब तलक मैंने भी तुम्हे भुला दिया होता
गर भुला देने का हुनर तुमने मुझे भी सिखा दिया होता..(वीरेंद्र)/1-753


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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