Saturday, 27 February 2016

3-91 तू है तो नहीं छोड़ रहा

तू है तो नहीं छोड़ रहा मैं इस दुनिया को,
वरना तो इसे भूल जाने में रक्खा क्या है,


बस तेरी मुहब्बत एक हकीकत है यहाँ,
वरना तो मसनवी ज़माने में रक्खा क्या है,


तेरी मेरी मुहब्बत में है कुछ ख़ास बात,
वरना तो इश्क के फ़साने में रक्खा क्या है,


तू ही है मेरी असली ख़ुशी इस दुनियां में,
वरना तो खुशियाँ मनाने में रक्खा क्या है,

तू बना है गर हमसफ़र तो सब हासिल है,
वरना तो मंज़िल को पाने में रक्खा क्या है,

तेरे ही वास्ते किया है मैंने घर को रौशन,
वरना तो वीरानों को सजाने में रक्खा क्या है..(वीरेंद्र)/3-91



रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"


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