Monday, 29 February 2016

2-384 गद्दारी की मानसिकता

गद्दारी की मानसिकता या देशद्रोहिता,
कभी भी हो नहीं सकती बुद्धिजीविता,


जिस दिन सहिष्णुता क्रांति कर बैठी,
कुचल देगी ये विचारों की विकलांगता,


सभी अपराध क्षमा कर देंगे देशभक्त,
कभी भंग न होने देंगे राष्ट्र की एकता,

उल्टे-मार्गियों और देश-लुटेरों सावधान,
देख रहा है देश तुम्हारी नंगी उद्दंडता,

अभिवयक्ति की आड़ में सहन न करेगी,
भारत माँ का अपमान भारत की जनता (वीरेंद्र)/2-384


रचना:.वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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