Sunday, 7 February 2016

2-378 प्यारे-प्यारे न्यारे-न्यारे फूल

प्यारे-प्यारे न्यारे-न्यारे फूल बेचारे फूल हैं,
भेंट दिए जाते हैं, कभी चढ़ा दिए जाते हैं,
कभी ये प्रेम के प्रतीक, कभी श्रद्धांजलि के,
ईश्वर की भक्ति में भी अर्पित किये जाते हैं,
स्वागत में,वंदन में,या फिर अभिनंदन में,
हार बना कर, गले में पहना दिए जाते हैं,
इनका कोई धर्म नहीं, और कोई जात नहीं,
सबके द्वारा ये इस्तमाल कर लिए जाते हैं,
लाल गुलाब बने प्रेम-प्रस्ताव का माध्यम,
चाहे न चाहे हाथों में पकड़ा दिए जाते हैं,
राहों में बिछते और बरसते हैं फूल बेचारे,
सुहागरात की सेजों पर सजा दिए जाते हैं,
बड़े कोमल, निर्मल, निश्छल होते हैं फूल,
शायद इसीलिए बेचारे तोड़ लिए जाते हैं,
छीनकर उनकी ताजगी,चहक,महक को,
अक्सर निर्ममता से वे कुचल दिए जाते हैं...(वीरेंद्र)/2-378
रचना; वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

No comments:

Post a Comment