Monday, 15 February 2016

2-376 दोस्तों की तलाश में क्यों

दोस्तों की तलाश में क्यों फिर रहे हैं हम,
क्यों न अब दुश्मनों को ही आजमा लें हम..(वीरेंद्र)/2-376

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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