Friday, 5 February 2016

2-370 अब आ भी जाओ, गमे-जुदाई

अब आ भी जाओ, गमे-जुदाई के सिवा कुछ लिखा जाता नहीं,
ढूँढता हूँ किताबों में खुशियों के नुस्खे पर कुछ नज़र आता नहीं..(वीरेंद्र)/2-370


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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