Monday, 1 February 2016

2-358 मेरी फालतू शायरी में

मेरी फालतू शायरी में गहराई नहीं, बस तुकबंदी होती है,
जैसे मियां-बीवी में लड़ाई नहीं, सिर्फ जुगलबंदी होती है।.(वीरेंद्र)/2-358

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"..

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