Monday, 29 February 2016

1-751 गैरों के हज्जूम में

गैरों के हज्जूम में अजनबी का कोई हमराह नहीं,
बंजारा मन है उसका, मंज़िल की कोई चाह नहीं..(वीरेंद्र)/1-751


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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