Tuesday, 23 February 2016

1-747 रात जब हो जाती है

रात जब हो जाती है, कुछ देर तबियत बहल जाती है,
ज़िन्दगी कुछ देर तो हसीं ख्वाबों में निकल जाती है..(वीरेंद्र)/1-747


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"../1-747

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