Monday, 8 February 2016

1-743 आई है तू मेरी ज़िन्दगी में

आई है तू मेरी ज़िन्दगी में, मेरे ख्वाबों से निकल के,
जैसे आ गया हो कोई फूल जूड़े में, चमन से निकल के..(वीरेंद्र)/1-743
रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

No comments:

Post a Comment