Wednesday, 3 February 2016

1-741 मसरूफ हो गया हूँ इश्क में

मसरूफ़ हो गया हूँ इश्क में तेरे इतना,
सोता भी हूँ तो तेरे ख्वाब देखने के लिए..(वीरेंद्र)/1-741


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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