Wednesday, 3 February 2016

1-740 तुमने जैसा भी चाहा अपनी

तुमने जैसा भी चाहा, अपनी मर्ज़ी चला ली,
पर ये रिश्ते अपनी-अपनी करने के नहीं होते..(वीरेंद्र)/1-740


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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