Monday, 1 February 2016

1-737 वाह, ज़िन्दगी पर भी और मौत

वाह, ज़िन्दगी पर भी और मौत पर भी सियासत आप की,
जीते जी कीमत दो कौड़ी भी नहीं, मरने पर पचास लाख की..(वीरेंद्र)/1-737
रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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