Friday, 12 February 2016

0-543 शिकवा किसी बेवफा से

शिकवा किसी बेवफा से ना होता,
गिला भी बेदर्द ज़माने से ना होता,
कोई भी इंसा मुगालते में न जीता,
गर आँखों में सबकी आइना होता..(वीरेंद्र)/0-543


रचना:वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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