Wednesday, 3 February 2016

0-539 शायरी ही शायरी लिखी

शायरी ही शायरी लिखी जाती है,
डायरी पर डायरी भरती जाती है,
तुम चाहे खुश हो चाहे हो नाराज़,
ग़ज़ल पर ग़ज़ल लिखी जाती है..(वीरेंद्र)/0-539
रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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