Monday, 1 February 2016

0-538 तेरा शेर मेरा शेर मिलकर

तेरा शेर मेरा शेर मिलकर क़ता हो जाय,
हमारे इश्क का ज़माने को पता हो जाय,
मतला मैं लिखूँ, और मक़्ता तू लिख दे,
चल आज एक ग़ज़ल मुश्तरका हो जाय..(वीरेंद्र)/0-538


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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