Wednesday, 27 January 2016

2-369 शाम भी हुई नहीं,

शाम भी हुई नहीं
इंतज़ार है रात की
हकीकत में जिओ
सोचो न ख्वाब की
पत्थर का है दिल
बातें जज़्बात की
प्यार की बूँद नहीं
चाहत बरसात की
रिश्तों में ठन्डक
मांग करें ताप की
नए निराले आप
क्या बात आपकी..(वीरेंद्र)/2-369

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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