Wednesday, 27 January 2016

2-367 जागो मेरे देश के सेक्युलर

जागो, मेरे देश के सेक्युलर साहित्यकार,
उठा लो कलम की जगह अपने पुरूस्कार,
देश में धर्म-निरपेक्षता घटती जा रही है,
'असहिष्णुता' फिर अपने फन उठा रही है,
मालदा और पूर्णिया पर तो तुम चूक गए, 
पंजाब, बंगाल में तुम्हे वो ललकार रही है,
मुस्लिम हत्या के बाद दलित हत्या हुई है,
जाती-आत्महत्या है,आम हत्या नहीं हुई है,
देश को अपनी निष्ठाओं का प्रमाण बता दो,
बिहार-चुनाव वाले शौर्य फिर से दिखा दो,
जागो, अबकी बार पुरूस्कार फिर लौटा दो..(वीरेंद्र)/2-367


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

No comments:

Post a Comment