Monday, 25 January 2016

2-346 आज के दौर में जो जितना

आज के दौर में जो जितना ज़हर उगलता है,
उतना ही ज्यादा उसको सब यहाँ मिलता है,
सीमित साधनों में सेंध लगाई चंद लोगों ने,
बाकी लोगों का घर-बार भी कहाँ चलता है..(वीरेंद्र)/2-346

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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