Sunday, 17 January 2016

2-343 इंतज़ार ही इंतज़ार किया

इंतज़ार ही इंतज़ार किया तमाम उम्र,
अब दफनाये जाने का भी इंतज़ार है,
कोई तो पूछे उनसे इस देरी का सबब,
जो कहा करते थे हमारी कब्र तैयार है..(वीरेंद्र)/2-343

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

No comments:

Post a Comment