Tuesday, 5 January 2016

2-333 सामजिक संवेदनाएं

सामाजिक संवेदनाएं अभी तक मरी नहीं, जिंदा हैं,
ये और बात है कुछ दरिन्दे भी अभी मरे नहीं, जिंदा हैं..(वीरेंद्र)/2-333

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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