Sunday, 31 January 2016

1-736 ये मेरी किस्मत थी

ये मेरी किस्मत थी, वो आकर मेरे कांधे पर झुक गए,
वो शरमा रहे थे, उनकी किस्मत कि चिराग बुझ गए।(वीरेंद्र)/1-736


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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