Sunday, 31 January 2016

1-735 वो शेर दिल में उतरते नहीं

वो शेर दिल में उतरते नही जिनमे कोई गहराई न हो.
मै कैसे सुनाऊँ वो ग़ज़ल जिसमे ज़िक्र-ऐ-तन्हाई न हो..(वीरेंद्र)/1-735


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी".,

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