Wednesday, 27 January 2016

1-731 अजब तासीर है इश्क की

अजब तासीर है इश्क की,
दूर रहकर भी हुआ जाता है..(वीरेंद्र)/1-731

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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