Wednesday, 27 January 2016

1-727 खुशियों की मंजिल की तलाश

खुशियों की मंज़िल की तलाश में न निकल
जहाँ से सफ़र शुरू उसी को मंज़िल समझ ले।(वीरेंद्र)/1-727


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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