Sunday, 17 January 2016

1-722 हर शाम जला देता हूँ

हर शाम जला देता हूँ उम्मीदों के चराग,
हवाओं के मिजाज़ से मुखालफत है मुझे..(वीरेंद्र)/1-722

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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