Sunday, 17 January 2016

1-721 डुबो कर भी कश्ती,

डुबो कर भी कश्ती, तुझे तसल्लियाँ मिली नहीं,
तू दरिया ज़रूर है, मगर तुझमे दरिया दिली नहीं..(वीरेंद्र)/1-721

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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