Sunday, 17 January 2016

1-717 बेवफा फिर से क्या मिले

बेवफा फिरसे क्या मिले, कुछ दर्द और मिल गए,
ज़ख्म जो भर चले थे मेरे, आज फिरसे छिल गए...(वीरेंद्र)/1-717

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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